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ऑगस्ट लैंडमेसर: इश्क की ताकत और प्रतिरोध का साहस।

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ऑगस्ट लैंडमेसर: इश्क की ताकत और प्रतिरोध का साहस। इस तस्वीर को ध्यान से देखिए। कुछ घटनाएँ होती हैं जिन्हें समय दर्ज कर रहा होता है। चारों तरफ खड़े लोग नाजी सलाम कर रहे हैं और बीच में खड़ा है ऑगस्ट लैंडमेसर, बेपरवाह और बेधड़क अंदाज में। ये तस्वीर अपने आप में एक पूरी किताब है, पूरा बयान है कि जब आप अकेले हैं और सारी भीड़ दूसरी तरफ है, फिर भी सच सुनने और कहने का साहस खत्म नहीं होना चाहिए। यह एक कार्यक्रम की तस्वीर है जहाँ ऑगस्ट काम करता था। एक जहाज बनाने वाली कंपनी के नए जहाज की लांचिंग का कार्यक्रम। जब सब कर्मचारी नाजी सैल्यूट कर रहे हैं, वहाँ ठीक बीच में ऑगस्ट लैंडमेसर अपने बेखौफ अंदाज में सामान्य खड़ा है। जो हिटलर के जर्मनी को जानते हैं, उन्हें अंदाजा होगा की तत्कालीन जर्मनी में ये कितना बड़ा कदम होगा। करीबन पचपन साल बाद जब ये तस्वीर Die Zeit में छपी तो इसने सारी दुनिया में तहलका मचा दिया। यह अभूतपूर्व था कि कोई ऐसा भी था जो उस दौर में भी अपने विचार, अपनी मान्यता के साथ खड़ा था। वो भीड़ नहीं था, अकेला था लेकिन कई सौ साल बाद उसकी तस्वीर देखकर उसके जैसे हजारों लोग तैयार हो रहे थे। ...

"भारत में मार्क्स से पहले ज्योतिबा की जरूरत है"

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"भारतीय समाज में मार्क्स से पहले सैकड़ों हजारों ज्योतिबा की जरूरत है" वैश्विक संदर्भों में कई बार ये सवाल उठता है कि आखिर भारत में इतनी असमानता और गरीबी होने के बावजूद, ये तबका वर्ग संघर्ष की कसौटी पर एकजुट क्यों नहीं हो सका? इतनी बड़ी संख्या में मजदूर और गरीब आखिर अछूते क्यों रह गए, उनकी सांगठनिक शक्ति प्रबलता से सामने क्यूँ नहीं आई। इसका एक सीधा सा जवाब है भारतीय समाज की संरचना जो जातीय और लैंगिक असमानता से बहुत गहराई तक ग्रसित रही है। ऐसी परिस्थितियों में वर्ग के अंदर वर्ग का जो चक्रव्यूह था, उसे भेदना सिर्फ मार्क्सवाद से संभव ही नहीं था। यहाँ जातीय तौर पर बँटा समाज, स्त्री पुरुष असमानता में बँटा समाज इस परिकल्पना को समझने के लिए ना तब तैयार था और ना अब है। कल्पना कीजिए कि अट्ठारहवीं शताब्दी का वो समय, जब देश में गरीबी, अशिक्षा सम्पूर्ण देश में फैली हुई थी, उस समय भी एक इंसान था जो ये सोच रहा था कि समाज में सबको समानता का अधिकार होना चाहिए, स्त्री और पुरुष में भेद नहीं होना चाहिए। ये थे महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले। फूलों का कारोबार करने वाले माली परिवार में जन...